ved puran पुराणों के दर्शन

 

ved puran

पुराणों के दर्शन 

( नंगा नाच )



Note : - केवल वयस्कों के लिए ।

* हिंदूइस्म में वेदों के बाद पुराणों को महत्व दिया जाता है लग भग 95 - 98 % हिंदू  पुराण इत्यादि ग्रन्थों पर अपनी आस्था रखते है , वेद  पुराण आदि में अंतर क्या है और हिंदूइस्म में अश्लीलता का नंगा नाच देखेंगे  ?

* चार वेद है ऋग्वेद , यजुर्वेद ,सामवेद ,अर्थर्ववेद जिनको  इश्वरीय ग्रन्थ या ईशवरीय ज्ञान कहते है हिंदूइस्म के  लोगो और 18पुराण , आदि ग्रन्थों को  स्रुति कहते यानी मानव निर्मित असल मे वेद और पुराण एक ही थाली के चट्टे बट्टे है यानी मानव निर्मित जिस में दुसरो का शोषण करना और हिंसा आदि भरा पढ़ा है ।

* बहरहाल कई बार वेदों में आतंक की शिक्षा और नियोग ,वेद और अश्लीलता के उद्धरण दे चुका हूं पर आज उससे भी आगे की बाते  बताने जा रहा हु जिसको सुनकर आंखे खुली की खुली रह जायेगी इन लोगो की हिंदूइस्म की असलियत क्या थी जिसका इतिहास गवाह है आये देखते कुछ ज्ञान विज्ञान की बाते ?

महृषि दयानंद सरस्वती जी का कथन  !





* प्रश्न : - ग्रन्थों  के विषय मे कोई ऐसा कहे कि असत्य ग्रन्थों ( पुराण आदि ) अगर उसमे कुछ सत्य बाते हो तो क्या उसको मानना चाहिए ?

* उत्तर : - जैसे अमृत के समान कोई भोजन हो उसमे अगर जहर पढ़ जाए तो तुम उसे खाना पसंद  करुंगे उसी प्रकार वेदों को छोड़ कर सब जहर के समान है । यानी पुराण आदि ग्रन्थ ।

* आर्य समाजी पुराण इत्यादि को नही मानते इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि उनके धर्म की पोल खोल देती है और उनको उनके समाज का आईना देखती है जो कि इतिहासो के पन्नो में दर्ज हो चुके है , और ये 150 सालो से उसे साफ करने में लगे है जिनको जितना बदल सकते थे उतना बदल दिया यानी वेद और मनुस्मृति के अर्थो को बदल बदल कर लोगो को बताना चाहते है कि ये ऐसा नही वैसा है आदि आदि और जिस पर कोई बस नही चला उनको झुटा ग्रन्थ साबित कर दिया 
पर इतिहास गवाह है कि आखिर हिंदूइस्म क्या है ।

* बरहाल आर्य समाजी पूरे सालन में नमक के बराबर भी नही है और  95 - 98 % हिंदूइस्म के मानने वाले आर्य समाजी को जूते की नुक पर राखते है और उनको आर्य समाजी कच्छरा कह कर संबोधित करते है , यानी आर्य समाज की कोई हैशियत नही है उनके नजदीक बरहाल ।

* पर  ज्यादातर पुराण आदि गर्न्थो को  सम्मान की नजर से देखते है पर खुद दयानंद ने पुराणों को नंगा कीया है , आये देखते है उसके कुछ उदाहरण ।


 ( ऋग्वेदादिभाष्यभूमिक ग्रन्थ विषय 25 )

* किसी किसी मंत्रो में तो ऐसा भी है , मद्यपान
( शराब  , भांग , आदि नसीली चीजे ) , मांस ,
मछली खाना , सब के सब इकट्ठे बैठ के अय्यशी करना , स्वयं की कन्या से और बहन से मैथुन 
संभोग ( हमबिस्तरी , हाथों से काम ले लेना )
करना । सच मे ऐसा होता था !

* शराब का मजा लेते लेते एक घर से दूसरे घर , दूसरे घर से तीसरे घर  जाना  और फिर सब जमा होकर पी - पीकर मदहोश हो जाना और पीते रहना ।  

* आखिर असलियत पता चल ही रही है हिंदूइस्म की 150 पहले आकर 3000 साल की गन्दगी और करतूतो पर पर्दा डालने में लगे रहते है । ये ऐसा नही है वैसा है  और सत्य तो इतिहासों के पन्नो में लिखा जा चुका है । अब देखते है आगे !


Ved purana


* और कई लोग रातों में किसी एक जगह पर जमा होकर उसे ब्राह्मण से लेकर हर कोई होता था , सब स्त्रियां व पुरुषों का मेला लग जाता फिर वे सब एक स्त्री को  नंगा करके उसी यौनि पूजा करते और इतना ही नही कभी कभी तो  पुरुषो को भी नंगा करके उसकी लिंग की पूजा करते थे 
( आज भी करते है ) 



* और फिर शराब से भरे प्याले उनको पिलाये जाते थे और फिर सब लोग मांस , शराब आदि का सेवन करते थे और इतना खाते पीते की जब तक  खा - खाकर ठेर न हो जाये फिर सब एक स्त्री के साथ सामुहिक संभोग करते थे और उसमे ब्राह्मण से लेकर सब कोई शामिल रहते थे फिर जब सब काम हो जाता तो कहते अब हम अलग अलग जाती के हो गए । यानी ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य और शुद्र ।




* क्या बात है हमे तो पता है , की ये सब सत्य और ऐसा हुआ करता था क़ुरान नाजिल होने के पहले पर ये लोग पर्दा डाला करते इन बता पर ,
पर अफसोस अब कुछ नही हो सकता इतिहास गवाह है इन बातों का । 

* किसी किसी मे तो ऐसा भी लिखा है कि अपनी माता को छोड़ कर सब स्त्रियों के साथ संभोग कर लेवे ( अपनी सगी बहनों , बेटियों इत्यादि )
इसमे कुछ गलत नही और किसी किसी का ये भी कहना है कि खुद की माता को भी न छोड़ें और किसी मंत्रो में ये लिखा है , की स्त्री की यौनि में लिंग फसा कर मंत्रो का जाम करने से संतान की उत्पत्ति जल्दी होती है ।




*  यज्ञशाला में यज्ञ करने वाले और यज्ञ करा ने वाले लोग कुमारी और स्त्रियों के साथ दिल्लगी कर कर के बात चीत करते है  इस प्रकार से की अपनी हाथों की उंगलियों से यौनि को दिखला कर हंसते है , जब स्त्री लोग जल्दी चलती है , जब इनकी यौनि देख कर पुरुष का गुप्त भाग हिलता है और स्त्री की यौनि और पुरुष का लिंग
से वीर्य्य निकलता है , कुमारी यज्ञ करने वाली    दिल्लगी ( हंसी से ) करती है , की जो यह तेरे लिंग के ऊपर का भाग मुह से सामान देखता है ।

Ved purana


* अब ब्रह्मा हंस के कहता है ये यजमान की स्त्री
( यज्ञ करने वाले की स्त्री  ) जब तेरे माता पिता पलंग के ऊपर चढ़ के तेरे पिता ने मुठ्ठी ( मोटे हाथ के जैसा ) लिंग तेरी माता के भग  डाला तब तेरी उतपत्ति हुई है , उसने यानी स्त्री ने भी ब्रह्मा
(वैदिक ईश्वर ) से कहा कि तेरी भी उतपत्ति ऐसी हुई है ,इस लिए दोनों  एक समान  हूए ।






* पुरुष लोग स्त्रियों की यौनि को हाथ से खेंचकर के बढ़ा लेवे जिससे स्त्रियों का पानी निकल जाता है , जब छोटा बड़ा लिंग उसकी यौनि में डाला जाता है तब यौनि के ऊपर दोनों अंडकोश नाचा करते है ।


* तू जांघो के ऊपर आ हाथ का सहारा दे और प्रसन्न  चित होकर तू पत्नी को आलीडन कर !

भावर्थ :- पति पत्नी दोनों प्रसन्न वदन होकर मुह से सामने मुह , नाक के सामने नाक  इत्यादि को  पुरूष के प्रशिप्त वीर्य को खेंचकर स्त्री की गर्भशय में  स्थिर कर । ( अथर्वेद 14 : 2 : 39 )


* ब्रह्चाये कन्या युवा पति को पाती है , बैल और घोड़ा  ब्रह्चाये ( कन्या ) के साथ घास सिंचना 
( गर्भधान करना ) चाहता है अर्थवेद 11-5-18 




* जब यज्ञशाला में यज्ञ करने वाले लोग ऐसा हंस थे है और अंडकोश नाचा करते है , जब तक घोड़े
का लिंग सम्राट की पत्नी की यौनि में काम करत है  और यज्ञ करने वाले का  भी लिंग स्त्रियों की यौनि  प्रवेश करते है और जब लिंग खड़ा होता है 
तब कमल के समान होता हैं जब उन दोनों का समगान होता है , तब पुरुष ऊपर और स्त्री नीचे होने से थक जाती है ।


* यजमान ( यज्ञ करने वाला व्यक्ति ) कहता है 
घोड़े तू मेरी स्त्री की जांघो के ऊपर आके उसकी
गुदा के ऊपर वीर्य (अपना पानी ) डाल दे उसकी
यौनि में अपना लिंग चला दे , वह  लिंग किस प्रकार का है , जिस समय यौनि में जाता हैं  उस समय उसी लिंग में स्त्रियों का जीवन होता है और  उसी से वे  भोग को  प्राप्त होती है , इससे तू उस लिंग को मेरी स्त्री की यौनि में डाल दे । 



* ये है ज्ञान - विज्ञान की बाते और इनकी असलियत जिन के खुद के घर शीशे के हो वो दुसरो के घरों पे पत्थर नहीं मरा करते , इसी लिए थोड़ा अपना इतिहास उठा के दिखो की कितनी बु आती है उसमें से पहले स्वयं की मान्यता जानो फिर इस्लाम पर ताना काशी करना ।














































* तो ये सब बाते है और गंदगी थी  जो पूरी ओर फैली थी 1450 वर्ष पहले ईस्लाम फिर से आया  जब जाके इन्होंने हम लोगो से शिखा की माँ की अजमत क्या होती है , बाप की इज्जत क्या होती है , बिवि के हुक़ूक़ क्या है , बच्चो की परवरिश किस तरीके से करना चलिए , खाने का तरीका , पिनेका का तरीका ,बैठने उठने का सलीका ,बड़ो की इज्जत सब कुछ इस्लाम से शिखा  और यहाँ तक  मनुस्मृति में फिर बदल कर करके इस्लाम की शिक्षा घुसो कर कहते ये हिंदूइस्म की शिक्षा है परंतु इतिहास गवाह है तुम्हारी शिक्षा का ये ही लोग है जो अपनी माँ बहनों की इज्जत बाजारों  में तार तार करते थे  और आज हमे शिखलाते हो और अपना इतिहास भूल गए ।


*  ये  सब तो चंद ही उदाहरण थे नही तो वेद और पुराण इत्यादि इन ही चीजो से भरा पढा है , 
और कुछ समय तक हमारे भी कुछ पूर्वज इन में फसे थे और सच्चे दिन को भूल बैठे थे , जिसके चलते शिर्क की अंधेरी में सच्चे पालनहार को छोड़कर इन गंदगियों पढ़ गये थे पाक पालनहार का मानव जाती पर इतना बड़ा एहसान हुआ कि उस ने अपना प्यारा रसूल मोहम्मद सल्लल्लाहु  अलैहि वसल्लम नबुस फ़रमाया  और क़ुरान ए पाक जैसी  अज्मतवाली कलाम नाजिल कीया
जो शिर्क और सब गंदगियों पाक साफ किया  इस्लाम की शिक्षा दी जो सच्चे पालनहार ने  हुज़ूर के जरिये मानव को बताई की माँ की अजमत क्या होती है , बाप की इज्जत क्या होती है , बिवि के हुक़ूक़ क्या है , बच्चो की परवरिश किस तरीके से करना चलिए , खाने का तरीका , पिनेका का तरीका ,बैठने उठने का सलीका ,बड़ो की इज्जत सब कुछ और ईमान की दौलत से माला माल कीया अल्हम्दुलिल्लाह  और हुज़ूर ए पाक  ने गुमराही से निकल कर उजाले की तरफ
ले गये सीधा रास्ता दिखाया ।




* पाक पालनहार का इतना बड़ा एहसान की उसने कलंकित और गंदगी से निकाल कर इस्लाम के दामन से बाबस्ता कीया अल्हम्दुलिल्लाह ।

* ये कुछ उदाहरण जो ऋग्वेदादिभाष्यभूमिक में है आप खुद चेक कर सकते मूर्खता इतना स्तर बड़ चुका है कि  इन्शान के गुप्त अंगों की पूजा कर लेते है । अफसोस ।

* अल्लाह का शुक्र है ,की मै मुसलमान हु अल्लाह से दुआ है कि ईमान पर जिंदा रख और ईमान मौत आता फ़रमा ( अमीन ) ऐसी गंदगियों से हमेशा दूर रख और  जो हमारे भाई इसी चीजो में फंसे है उन्हें इस्लाम की हिदायत दे आओ मेरे नॉन मुस्लिम भाईयो सच्चई की तरफ इस्लाम की तरफ एक सच्चे पालनहार के सिवा कोई दूसरा पूजनीय नही और उसके नबी की इताअत करो यही  सीधा रास्ता है कहा भटके जा रहे हो ।

पहले सब एक ही दिन पर थे ।


إِنَّ هَٰذِهِۦٓ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَٰحِدَةً وَأَنَا۠ رَبُّكُمْ فَٱعْبُدُونِ


बेशक ये तुम्हारा दीन (इस्लाम) एक ही दीन है और मैं तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो मेरी ही इबादत करो । ( 21 : 92 )


وَتَقَطَّعُوٓا۟ أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ كُلٌّ إِلَيْنَا رَٰجِعُونَ


और लोगों ने बाहम (इख़तेलाफ़ करके) अपने दीन को टुकड़े -टुकड़े कर डाला (हालाँकि) वह सब के सब हिरफिर के हमारे ही पास आने वाले हैं ।  ( 21 : 93 )


كَانَ ٱلنَّاسُ أُمَّةً وَٰحِدَةً فَبَعَثَ ٱللَّهُ ٱلنَّبِيِّۦنَ مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ وَأَنزَلَ مَعَهُمُ ٱلْكِتَٰبَ بِٱلْحَقِّ لِيَحْكُمَ بَيْنَ ٱلنَّاسِ فِيمَا ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ وَمَا ٱخْتَلَفَ فِيهِ إِلَّا ٱلَّذِينَ أُوتُوهُ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَٰتُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ فَهَدَى ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لِمَا ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ مِنَ ٱلْحَقِّ بِإِذْنِهِۦ وَٱللَّهُ يَهْدِى مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ


(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुश ख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाज़िल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख्तेलाफ डाल रखा था और ख़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है । ( 2 : 213 )


شَهِدَ ٱللَّهُ أَنَّهُۥ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ وَأُو۟لُوا۟ ٱلْعِلْمِ قَآئِمًۢا بِٱلْقِسْطِ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ


ज़रूर ख़ुदा और फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है कि उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं है और वह ख़ुदा अद्ल व इन्साफ़ के साथ (कारख़ानाए आलम का) सॅभालने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वही हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (सच्चा) दीन तो ख़ुदा के नज़दीक यक़ीनन (बस यही) इस्लाम है ।
( 3 : 18 )











jihad-ek-ibadat.




हक़ बात ( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।(2-256).  



पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है। (16:90).    

नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।  (81:27,28,29)(40:28)
       
ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है (सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     
    
और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)

कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      
*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट 
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है। (17:81) 



* इस लेख का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि उन इस्लाम विरोधीयो  को जवाब देना है  जो खुद की धार्मिक गर्न्थो की मान्यता को नही जानते और इस्लाम और मुसलमानों के ऊपर तानाकाशी करते है।

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