Arya samaj ka jhut आर्य समाज का झुठ
Arya samaj ka jhut
आर्य समाज का झुठ
* एक लेख जो कि आर्य समाज की पोल खोल देंगी ?
* आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल 1875 मुंबई में झुट की बुनियाद पर खड़ी हुई ।
* जिस के बानी दयानंद सरस्वती थे ।
* दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को ग्राम टंकार , काठियावाड़ गुजरात के ब्राह्मण कुल मे हुआ था ।
* लग भग 14 वर्ष की आयु से ही नफरत फैलाने का काम शुरू कर दिया था जो कि आज तक उनके शिष्य कर ते नजर आते है और घर से भाग गए थे ।
* दयानंद सरस्वती ने कई पुस्तकें लिखी जिसमे से प्रशिद्ध पुस्तक का नाम है ,चुत्यार्थ प्रकाश अरे माफ करना सत्यार्थ प्रकाश
है , और अधिकतर आर्य समाज इसी पुस्तक को पढे के बाद वेदों के विद्धवान बन
बैठे है और वेदों के तरफ कभी नजर भी नही करते है कहते सत्यार्थ प्रकाश काफी
है हमारे लिए क्योंकी दयानंद ने पूरा वेदों का निचोड़ इसमे लिखे दिया है
और आर्य समाज के लिए ये पुस्तक पूजनीय जैसी प्रतीत होती है । ये रही वो
पुस्तक ।
* कहते है , बड़े बडे मुल्लो की इस किताब पढ़ने के बाद ईमान ढग मगा जाता है , ये बात मिथ्था से कम नही ।
* सत्यार्थ प्रकाश की पोल -खोल और 14 समुलास का जवाब 9 भाग है यहाँ देखे @
* दयानन्द जी की पुस्तक खुद दयानंद जी के बारे मे क्या कहती है आये देखते है ?
* प्रश्न : - क्या ईश्वर अपने भक्तों के पाप क्षमा करता है या नही ?
* उत्तर : - नही ! क्यों कि जो पाप क्षमा करें तो उसका न्याय नष्ट हो जाये और सब मनुष्य माह पापी हो जाए ।
( 7 समुल्लास पेज 158 )
* ओहो फस गये ईश्वर भी कभी क्षमा नही करेंगा पता नही पूर्णजन्म में दयानंद सरस्वती जी कोनसी यौनि में जन्म लेंगे ?
आये देखते है दयानन्द जी के कारनामें
* भोले भाले हिन्दू को मूर्ख बनाने की साजिश ?
* रक्षक सेनापति का आदर करे बहुत
* खड्ग , बंदूक और तोप आदि शस्र बनाने वाले तुम लोगो का सत्कार करते है ।
* वह सेनापति शस्त्रों को हाथ मे रखने हरे औऱ सिखये हुए बलवान जिन के बंदूक और तोप आदि अग्नि बहुत
भुशुण्डि = बंदूक
* अब ये क्या बात है वाह बंदूक और तोप ?
Ak47 , रॉकेट लॉन्चर , टैंक , इत्यादि क्यों कर छोड़ दिये । वे भी लेख देते ?
* एक समझदार व्यक्ति केवल यही बात पर हंस सकता है केवल और कुछ नही ?
* क्या महाभारत और रामायण में ये अस्त्र शस्त्र का उपयोग हुआ था ??
* या फिर इन युद्ध के बाद वेदों की रचना हुई ? जैसे इन लोगो का कहना है ।
* भाई किसी चीज की हद होती है , अगर छोटे बच्चे को भी बताए तो वो भी हंस पड़ेगा
* मुझे यकीन है कि ये लोग सूर्य पर पानी की खोज कर लेंगे ।
*मुझे नही लगता कि इसके बाद मुझे कुछ बोलने की आवश्यकता है ।
विमान ( हवाई जहाज ) का आविष्कार
* विमान 120 फिट की ऊँचाई और 12 सेकेंड तक उड़ा था ।
* उसके बार फ्रांस की एक कंपनी ने भी ये दावा किया था लेकिन 1908 ईसवी में पूरी दुनिया मे राइड बंधु को अविष्कार की मान्यता दे दी ?
* जरा बताना की वह पहले विमान चालक का नाम और उसके अविष्कार करने वालो का नाम ?
* बंदूक और तोप के आविष्कार करने वालो का नाम ?
* और सब से बड़ा सत्य तो ये है , जो सच्चे वैदिक धर्म को मानने वाले है , और सब मानव का आदर और समान करते है जो कि 90 % लोग है जो कि आर्य समाज को वैदिक धर्म के नही मानते और आर्य समाज को कचरा कहते है ये मेरे शब्द नही बल्कि जिनसे सुना उनकी बात कर रहा हु , जिसका एक उदाहरण ये है ,ये महाशय भी वैदिक धर्म को मानने वाले है जो कि 1 वेब साइट , 3 ब्लॉग और फेसबुक पेज इत्यादि का काम करते है !
* हा अगर खुद के सत्य होने का दावा है , तो लोगो को अपने धर्म की शिक्षा बताओ जिसका पसंद आएगा वो खुद आगे से चलके तुम्हारे पास आ जायेगा तुम्हे उसके पास जाने की कोई आवश्यकता नही पड़गी ।
* पर नही लोगो मे नफ़रत फैलाने का ठेका जो ले रखा है , ये घबरा गए है कि हमारी दुकान बंद होने वाली है और सब यहा से निकल कर जा रहे है , यही असल वजह है इनकी बौखलाहट का ।
* आज कल हमारी युवा पीढ़ी के लोगो
भी आर्य समाजी की बातो को सुनकर इस्लाम और उनके मानने वालों पर टिप्पणी
करना शुरू कर दि है और अपने आपको बुद्धिमान समझे लग गये है , मुझे तो हंसी
आती है ऐसे मूर्खो पर बरहाल इस्लाम विरोधीयो को कोइ ना कोई मुद्द चाहिए
ही !
* क्या इन्हें पता है कि इन लोगो के बारे में आर्य समाजी की क्या मानसिकता रखते है ।
* या केवल आपका इस्तमाल कर रहे है मुसलमानो के विरूद्ध में ।
* हिंदूइस्म के देवी वेदता का अपमान *
* प्रशन : - देखो ! कलकत्ता की काली और कामाक्ष आदि को लाखों मनुष्य मानते है ?
क्या ये चमत्कार नही ?
उत्तर : - कुछ भी नही ! वे अंधे लोग भेड़ के तुल्य है , एक के पीछे दूसरे चलते है ।
खाई में गिरते है ; हट नही सकते ।
वसे एक मुर्ख के पीछे दूसरे चलकर मूर्ति पूजा में फंसकर दुख पाते है ।
(मूर्ति पूजक को मुर्ख कहा जा रहा है !
अगर ये एक मुसलमान कहता तो बवाल हो जाता ?)
* इसी तरह से महादेव , कोटपाल , कलभैरोव इत्यादि के बारे में टिप्पणी की गए है !
*सोमनाथ का सच दयानद जी की जुबानी
* प्रश्न : - देखो सोमनाथ जी पृथ्वी के ऊपर रहता था बडा चमत्कार है , क्या यह मीथा बात है ?
* उत्तर : - हा ! ये मिथ्या है सुनो ऊपर नीचे चुम्ब पाषण लगा रखे थे !
उसे आकर्षण से मूर्ति अधर खड़ी थी ।
( अगर ये एक मुसलमान कहता तो बवाल हो जाता ? क्योंकि की आस्था का मामला बन जाता और अब आस्था कहा गई ?)
* भगवात पुराण का अपमान *
* वाह रे वाह ! भागवत के बनाने वाले
लालभुजक्कड़ ?
क्या कहना ! तुझको ऐसी -ऐसी बाते मिथया बाते लिखने में तनिक भी लज्जा और शर्म नही आई , निपट अंधा ही बन गया ।
(अगर ये एक मुसलमान कहता तो बवाल हो जाता ?)
* जो चोर , डाकू , कुकमरी लोग है , वे भी तुम्हारे देवताओं के अधीन होंगे ?
देवता ही उन् से दुष्ट काम करता है ?
जो वैसा है तो तुम्हारे देवता और रक्षक में कोई भेद न रहेंगा ?
(अगर ये एक मुसलमान कहता तो बवाल हो जाता ?)
* प्रश्न :- क्या गरुड़ पुराण भी झुटा है ?
उत्तर :- हा असत्य है !
(अगर ये एक मुसलमान कहता तो बवाल हो जाता ?)
* प्रश्न : - क्या यमराज , चित्र
गुप्त के पर्वत के समान शरीर वाले जीव को पकड़ कर ले जाते है , पाप , पुण्य
के अनुसार नरक व स्वर्ग में डालते है ।
उस लिए दान ,पुण्य , श्रद्धा , तपुर्ण इत्यादि के लिए करते है , ये बाते झुट क्यों कर हो सकती है ?
उत्तर : - ये सब पोपलीला के गपोड़े है ।
इसे आगे दान ,पुण्य , श्रद्धा , तपुर्ण इत्यादि का मजक उड़ाया है ?
* दान
,पुण्य , श्रद्धा , तपुर्ण इत्यादि उन मारे हुए जीव को तो नही पूछता
किंतु मृतको के प्रति निधि पॉप जी ( पंडित जी ) के घर और हाथ मे पहुचाता है
।
* यहां तो इन्होंने महाभारत के 88 अध्ययन का रद्द ही कर दिया । 😢
* सारे पुरानो को वेद विरोधी बता रहे है ये तो
क्या ये सत्य है ???????
और कई मंत्रो का भी मजक उढाया है
*और भी बहुत कुछ है ? *
(सत्यर्थ प्रकाश 11 समुलास
पेज नंबर 259 to 291 )
* पुजारी लोग उनके नाम पर भीख मांगते हैं और उनको भिखारी बनाते है ।
(अगर ये एक मुसलमान कहता तो बवाल हो जाता ?)
* संत कबीर का भी मजक बनाया है ? *
* प्रश्न : - कबीर पंथी तो अछि है ?
उत्तर : -नही !
* वह उटपटांग भाषा बनाकर जुलाहै आदि नीच लोगो को समझाने लगा ।
तंबूरा लेकर गता था , भजन बनाता
था , विशेष पंडित , शास्त्रों , वेदों की निंदा कर था ( उनको सच्च का आईना
बताते थे इसलिए वो गलत हो गए जो इंके सुर में सुर मिलाए तो ठीक नही सब गलत
👍👍 )
* मुर्ख लोग उस के जाल में फंस गए जब मार गया तो उसे शिद्ध बना लिया ।
जो जो उसने लिखा था उसको उसके चेले पड़ते थे और लोगो को गुमराह करने लगे ,
भला विचार देखो की इस मे आत्मा की उनत्ति और ज्ञान क्या बढा सकता है ,
यह केवल लड़को की खेल की लीला के समान है ।
😢😢😢😢😢😢😢
(सत्यर्थ प्रकाश 11 समुलास
पेज नंबर 292 to 293 )
* इसी तरह से गुरु नानक जी का भी अपमान किया है ? *
* नानक जी का आशय तो अच्छा था , परन्तु विद्या कुुुछ नही थी ,
वेददी शास्त्र कुछ नही जानते थे , नही संस्कृत । अगर जनते होते तो ,निर्भय शब्द को निर्भा क्यों लिखते ?
( इसलिए ये दयानद जी अपने सिवा किसी को विद्वान नही समझते थे , लगता है पूरे विश्व का ज्ञान दयानद को ही था ? )
* इसलिए पहले ही अपने शिष्यों के सामने कही कही वेदों के विरोध में बोलते थे , और कही कही वेदों को अच्छा भी कहा है,
क्यों कि अच्छा न बोलते तो लोगो उन्होंने नास्तिक बनाते ?
* जो नानक जी वेदों ही का मान करते तो उनका संप्रदाय न चलते न वे गुरु बन सकते थे क्यों कि संस्कृत विद्या तो आती नही थी ,
तो दूसरों को पढ़ा कर शिष्य कैसे बनाते ?
वेददी शास्त्र कुछ नही जानते थे , नही संस्कृत । अगर जनते होते तो ,निर्भय शब्द को निर्भा क्यों लिखते ?
( इसलिए ये दयानद जी अपने सिवा किसी को विद्वान नही समझते थे , लगता है पूरे विश्व का ज्ञान दयानद को ही था ? )
* इसलिए पहले ही अपने शिष्यों के सामने कही कही वेदों के विरोध में बोलते थे , और कही कही वेदों को अच्छा भी कहा है,
क्यों कि अच्छा न बोलते तो लोगो उन्होंने नास्तिक बनाते ?
* जो नानक जी वेदों ही का मान करते तो उनका संप्रदाय न चलते न वे गुरु बन सकते थे क्यों कि संस्कृत विद्या तो आती नही थी ,
तो दूसरों को पढ़ा कर शिष्य कैसे बनाते ?
* मूर्ति पूजा तो नही करते थे परंतु विशेष ग्रंथ की पूजा करते थे , क्या ये मूर्ति पूजा नही ???????
* जैसे मूर्ति पूजा वाले लोगों अपनी दुकान जमकर जीविका ठाडि की है , वैसे इन लोगों ने भी कर ली है ।
* जैसे मूर्ति पूजारी मूर्ति के दर्शन करते है और भेंट चढ़ावाते है वैसी ही नानक पंक्ति लोग गर्न्थो की पूजा करते है ।
* जैसे मूर्ति वाले मूर्ति पूजा ते है वैसे ही ये ग्रन्थ साहब की करते है !
* हा ! यहाँ कहा जा सकता है कि न इन्होंने देखा ना हीँ सुना इसलिए !
(सत्यर्थ प्रकाश 11 समुलास
पेज नंबर 293 to 295 )
* जो वेदविद्या हीन है
यानी जो वेदों को नही जानता वो
वह अनाड़ी है ( शुद्र है । )
* मनुसमूर्ति का वचन *
जो वेदों की निंदा करता है वो नास्तिक है ।
( 1 : 130 )
* मतलब कि चाटु कारिता करो तो ठीक है !
मनिसमूर्ति ( 1 : 91 )
नही तो ?
* (वेदविरोधी) उन लोगो को काट डाल, उसकी खाल उतार दे,उसके मांस के टुकडो को बोटी-बोटी कर दे,उसके नसों को एठ दे,उसकी हड्डियों को मसल डाल उसकी मिंग निकाल दे,उसके सब अडो(हस्सो) और जुडो को ढीला कर दे(अथर्वेद 12:5:7)
* जो आज -कल हो रहा है, लोगो के साथ इंडिया में ex. मुसलमान के साथ हर जगह मार जा रहे है। तो भी मुसलमान आतंकवादी है (अफसोस कि बात है) हमारे दलित,ईसाइयो , etc साथ हो रहा है।
* ऋग्वेद 10 :90 : 12
* यजुर्वेद 31 : 10- 11
* मनुसमूर्ति 1 :87
💐* वाह भाई वाह या पोप लीला है *💐
शुद्रो की परिभाषा बताई है उसके मुताबिक पूरी दुनिया मे 99 % लोगो शुद्र हो गए !
* दयानंद सरस्वती जी
का कहना है कि यूनान, मिस्र , यूरोपीय देशों, इत्यादि , हब्शी ,मगोलिन अरब
देशों में बसने वाले सब शुद्र है , की इन्होंने वेदों को देखा नही ना ही
सुना ?
( सत्यार्थ प्रकाश 7 समुलास )
* मतलब जानते नही थे मतलब अनाड़ी थे
तो साफ कहो न कि वह शुद्र थे ।
हर हकीकत में शूद्रो में ही ज्ञानी पैदा तो है ना कि xyz में पूरी दुनिया जानती है ।
* स्वामीनारायण का भी अपमान *
* उसने देखा कि यह देश मुर्ख भोला भला है ( देश को मूर्ख कहा ईरानी ने ) जैसे इन लोगो को अपने मत में झुक ले वैसे ये झुक सकते है । वह उसने दो चार चेले बनाये । नारायण का अवतार बात कर प्रशिद्ध हो गया । नाक वाली कहानी तो सुना ही है उस का झुट मुट का बता कर मजक उठाया है ।
(सत्यर्थ प्रकाश 11 समुलास
पेज नंबर 303 to 307)
*इसी तरह बौद्ध , जैन , ईसाई इत्यादि का अपमान किया है ।
(12 ,13 , 14 समुलास में )
(12 ,13 , 14 समुलास में )
* आर्य समाजीयो ने नफरत का बीज बोया है लोगो मे । नही तो कोई ये पुस्तकें के पहले की कुछ बात बता दे कि इस तरह से किसी ने किसी का अपमान किया हो ?
* NOTE : - अगर इस मे से को एक
बात भी कोई मुसलमान कहते तो अब तक आतंकवादी , फ़सादी , देशद्रोही , भड़काओ
भाषण इत्यादि कह कर संबोधित करते ।
* परतु अब कहा गईं तुम्हारे बोल और धार्मिक भावना ?
* ये वे लोग है जो तुम्हारे प्रिय है जिन्होंने तुम्हारे गुरु का मजाक बनाया है ?
* या फिर मुसलमानो से हसद की बुनियाद पर बुलाते हो ?
*अगर इतनी अपने गुरु इत्यादि से मोहब्बत है तो आर्य समाजी को बोल के दिखलावे ?
एक और बड़ा झुट ?
* जो कि पहले सब वैदिक धर्म के ही थे और आर्य ही थे , और 1 अरब वाली परिभाषा पता नही कहा से ले आये ?
* आये देखते है कि वेद इनके बारे में क्या कहते है ?
ऋग्वेद 1 :162 : 13
* तो ये मांस कौन पकता था आर्य समाजी ?
वेद जब भी लिखा गया होगा उस वक्क्त के लोगो घोड़ा , गाय इत्यादि का मांस खाते थे ।
| (25 : 35 ,36 ) |
* उसी प्रकार कुछ ये भी है ।
( ऋग्वेद 10 : 91 : 14 )
( अर्थवेद 8 : 6 : 23 )
( अर्थवेद 6 : 71 :1 )
( यजुर्वेद 20 : 87 )
( ऋग्वेद 1 - 162 - 11)
तो क्या ये ऋषिमुनि करते थे ?
तो क्या ये ऋषिमुनि करते थे ?
* और आगे ये ............
*अब दूसरे देश या अनार्य लोगो को वहां लूट -मार और दुर्लभ व्यवहार करे ।
*यह वज्र सत्य धर्म (वैदिक धर्म) की तुर्ति करे , इस शत्रु की राज्य की (उसकी सल्तनत) नाश करके उसके जीवन को नाश कर देवे (वहां अच्छी शिक्षा है) उसकी गले की नाडियो को काटे और गुददी नाड़ियो को तोड़ डाले।(अथर्वेद6:135:1)
* उचे लोगो से नीचे-नीचे और गुप्त होकर जमीन से कभी न ऊठे और दंड से मार डाला गया पढ़ा रहे।(अथर्वेद6:135:2)
* हिंसको को मार डाल औऱ गिरा दे,जैसे वायु पैड को (NOTE:- )गौ, घोड़ा और पुरूष को मत छोड़ो(या तो इसका एक मतलब है,की मार डालो या फिर गुलाम बनालो)है हिंसा शील(मजलूम को हिंसक कहा जा रहा बल्कि खुद हिंसा कर रहे है।)यहां से लौट कर प्रजा की हानि के लिए जगह दे (अथर्वेद10:1:17)
* कहते है, की लौहे की बनी तलवार घर है (अथर्वेद10:1:20)
* तेरी गिरवा की निडियो और दोनो पैरो को भी मैं काटूँगा निकल जा।(सब को निकाल दो ,तुम लोग रहो).(अथर्वेद 10:1:12)
* पीछे को चढाये गए दोनों भुजाओ को(हाथों)और मुख(मुँह) में बांधता हु।(अथर्वेद 7:17:4'5)
* में उस शत्रु को उसके घर से निकलता हु, जो शत्रु सेना चढ़ता है(यानी जो इनके मुक़ाबिल आता है तो घर से निकाल कर मर देंगे)प्रतापी राजा(लीडर)उसको अपने निविहन ग्रहा व्यवहार से गिराये।( अथर्वेद6:75:1)
* मांसभक्ष को मूल सहित भस्म कर दो।(अथर्वेद 8:3:18)
NOTE * हे विद्वन आपके अनार्य देशो(जो आर्य देश नही है)में बसने वालो मे गांव से नही दुग्ध आदि को दुहते।(जो गौ दूध नही देती)दिनको नही तापते है(जो वेदों से अपरिचित है) वे क्या करते वह करे आप हम लोगो के लिए जो कुलीन मुझ को प्रप्त होता है,उसके धनोको सब प्रकार से धारण करे(पकड़ना-उसके माल को आसान शब्दों में लूट लेना वाह क्या बात है)और ये क्षेषट धन से युक्त आप हम लोगों के नीचे शक्ति जिसमे उसकी नितृति करो।(यानी गुलाम बनाओ)👌बोहत खूब(ऋग्वेदा 3:53:14)
* सत्यार्थ प्रकाश में दयानद सस्वती यही बात करते है।
*इस व्यवस्था को कभी न तोड़े की जो-जो युद्ध मे जिस-जिस भृत्य( सैनिक)वा अध्यक्ष ने रथ, घोड़ा, हाथी,छत्र, धन,धान्य, गाय, आदि पशु और NOTE स्त्रीया(लेडिस)तथा अन्य प्रकार के सब द्रव्य और घी .......... इत्यादि युद्ध मे जाते उस-उस को ग्रहण करे (यानी लूट लो) यही बात मनुसमूर्ति में कई जगह पर लिखी है। * तो क्या स्त्रीयो के साथ नियोग के नाम पर बलत्कार करें।(वाह भाई वाह )क्या बात है(6 समुलास पेज नम्बर126) इसके आगे लिखा है कि किसको कितना हिसा मिलना चाहिए।
*और ऋग्वेदादीभाष्यभूमिक में लिखा है कि युद्ध ही एक मात्र धन प्रप्ति का जरिया हैं इसी लिए उसे निघण्टु कहा जाता है(यानी महाधन का जरिया) दूसरों को लूटो धन जमा करो और ये बात मनुसमूर्ति में भी है।
(22-10 राजप्रजाधर्मविषय पेज नम्बर 285)
* शायद आर्य समाज खुद को ही शुद्रो और अनार्य , मलेच्छ कहना तो नही चाहते ?
* मेरे प्रिय मित्रों कहते है की
मानव उपत्ति के कुछ ही सालो के बाद वेदों की प्रप्ति हो गई थी तो ये असुर ,
अनार्य इत्यादि से युद्ध जो कि वेदों में कूट कूट कर भरा पड़ा है , ये सब
कहा अन्तरिक्ष में हो रहा था ?
* मेरे भोले मित्र अगर कोई घटना
हो जाती है , और इतिहास बन जाता है उसे ही लिखा और बताया जाता है नाकि उसके
पूर्व इतनी तो समझ होनी चाहिए ?
* एक छोटी सी बस्ती बसने के लिए
कई साल लग जाते है , और इतना सब कुछ था पहले से तो कितना समय लगा होगा ,
इसी लिए लोगो को मूर्ख बना छोड़ दो , वेदों की रचना लग भग 3000 वर्ष से
ज्यादा नही क्योंकी सभी इतिहासकार का कहना है ।
* और आर्य समाजी आम हिन्दू को
बताया करते है , वेदों इतने पुराने है , कभी तन्हाई बे बैट कर सोचना की
क्या बात है ? और वैसे भी वेदों का ईश्वर ये नही जानता कि हम 2 मिनिट के
बाद क्या करेंगे , इसे भी पता चला कि वैदिक ईश्वर नही जानता कि क्या होने
वाला है , वो भी होने के बाद बताता है , पहले सब हो चुका होगा तभी तो ये सब
4 ऋषिमुनि को बताया होगा ? ये सब आपकी मान्यता है , की ईश्वर कुछ नही
जानता इसके बारे में आप कोई भी आर्य समाजी से पूछ सकते है कि मैं 2 मिनिट
बाद क्या करने वाला हु ए वैदिक ईश्वर जनता है या नही ? अगर उत्तर देता है
तो प्रमाण जरूर मांगना वेदों से ।
* आर्य समाज ने घर वापसी का
मिशन चालू किया था झुट की बुनियाद रख कर जो कि मैं ऊपर बता चुका हूं , और
वेदों के साथ क्या किया है ये देखते है ?
* वेदों में 80 % अपनी मनमर्जी के
मुताबिक वेदों का भाष्य की है और मिलावट कर कर में ज्ञान विज्ञान बताने
की ना काम कोशिश की है , आये देखते है ?
* तोप आदि शस्त्रों के उठे धूम वा मेघ के आकार जो अस्त्र का धूम होता हैं ।
(यजुर्वेद 17 :46 )
* रक्षक सेनापति का आदर करे बहुत
से अच्छे बाण , तलवार , बंदूक , तोप और तोमर आदि शस्त्र जिस के हो उसको अन्न देवे ।
( यजुर्वेद 16 : 20 )
* खड्ग , बंदूक और तोप आदि शस्र बनाने वाले तुम लोगो का सत्कार करते है ।
( यजुर्वेद 10 :27 )
* वह सेनापति शस्त्रों को हाथ मे रखने हरे औऱ सिखये हुए बलवान जिन के बंदूक और तोप आदि अग्नि बहुत
अस्त्र विद्यमान है । ( यजुर्वेद 17 : 35 )
भुशुण्डि = बंदूक
खड़ग=प्रचीन शस्त्र , तलवार ,बंदूक और तोप आयुधम = हथियार
* अब ये क्या बात है वाह बंदूक और तोप ?
Ak47 , रॉकेट लॉन्चर , टैंक , इत्यादि क्यों कर छोड़ दिये । वे भी लेख देते ?
क्या ज्ञान बाट रहे हो ?
या फिर हिन्द के भोले भाले लोगो को मूर्ख बनाने का ठेका ले रखा है ?
* एक समझदार व्यक्ति केवल यही बात पर हंस सकता है केवल और कुछ नही ?
* क्या महाभारत और रामायण में ये अस्त्र शस्त्र का उपयोग हुआ था ??
😢😢😢😢
* या फिर इन युद्ध के बाद वेदों की रचना हुई ? जैसे इन लोगो का कहना है ।
* विलयन साहब और मोक्षमिलर साहब
इत्यादि । की वेद 2400 साल , 3000 साल , 3100 साल ही पूराना है । हा में भी इस बात यकीन रखता हूं ।
* अब देखते है बंदूक और तोप का आविष्कार किसने किया और कब किया ?
* ईसवी सन 1294 में बारूद का अविष्कार हुआ ।
* और 14 वी सदी में तोप का जन्म का आरंभ होने जा रहा था।
* 15 वी सदी में बन बंदूक हाथ मे आ गई ।
उसके बाद मस्केट , मेयलोक ,फिल्टलोट और पिस्तौल और भी आधुनिक राइफल में होने लगा उपयोग ।
* 1884 में पहली मिसाइलगैन बानी !
* अब देखते है तोप का आविष्कार हिन्द में किसने किया ?
* सन 1792 - 99 ईसवी मैसूर के सुल्तान
हज़रत टीपू सुल्तान
(जिनको मिसाइल मैन से भी जाना जाता है)
* अंग्रेजो के विरुद्ध के में
लोहे की बनी रॉकेट मिसाइल का आविष्कार करके प्रयोग किया जिसके चलते ब्रटिश
आर्मी में घबराहट का माहोल फैल गया था ,
( तो भी मुसलमान देशद्रोही है अफ़सोस )
फिर उसके बाद अंग्रेजों ने तोप का महत्व जाना और उसकी तकनीक को विकसित कर के पूरे विश्व मे फैला दिया ।
* और दुनिया को रॉकेट ( तोप ) देने वाला मुसलमान देश का बेटा , देश की जान बान आन , शान हज़रत टीपू सुल्तान
थे । आज कल इनके बारे में भी टिप्पणी कर के देश द्रोही का सर्टिफिकेट बटा जा रहा है ।
जयन्ती पर भी एतराज अफसोस कि बात है
शर्म आनी चाहिए जिसने अपने देश के लिए जान देदे वह लोगो देशद्रोही ।
👌💐 वाह भाई वाह 💐👌
* अनक़रीब इन्हें भी सर्टिफिकेट दे देंगे ? *
* और ये लोग ने क्या दिया " 0 "
उसके लिए यह देखे
" 0 " का झोल
* अभी थोड़ी हंसी दबाकर रखे आगे और भी है ।
आकाश में चलने वाले रथ को आकार स्थिर हो अर्थात उसमे बैठ ।
( यजुर्वेद 17 : 37 )
* बहुत से विमान आदि यानो के बनने हरे ।
( यजुर्वेद 16 :27 )
* अब ये क्या तमाशा है , आकाश में चलने वाला रथ कौन सा था , और रथ चालक का नाम क्या था ?
* भाई किसी चीज की हद होती है , अगर छोटे बच्चे को भी बताए तो वो भी हंस पड़ेगा
* रामायण में रामचन्द्र जी रावण का वध करने के बाद रथ पर उड़ के गए ।
* महाभारत के 5 G था ।
* प्लास्टिक सर्जरी
* गोबर , दही और मूत्र से कैंसर का इलाज
* गडर से गैस का निर्माण इत्यादि ।
वाह वैदिक ज्ञान विज्ञान ।
* मुझे यकीन है कि ये लोग सूर्य पर पानी की खोज कर लेंगे ।
सूर्य पर वेदों का जाप तो ढूंढ ही लीया
अनक़रीब ये भी ढूंढ ही लेंगे
लगे रहो 👌
*मुझे नही लगता कि इसके बाद मुझे कुछ बोलने की आवश्यकता है ।
विमान ( हवाई जहाज ) का आविष्कार
राइड बंधु ने 17 दिसम्बर 1903 में के दिन ऑरविल और वीलर ने कोर्लिना में राइड फ्लायर नामक विमान से सफल उड़ान भरी थी ।
* विमान 120 फिट की ऊँचाई और 12 सेकेंड तक उड़ा था ।
* उसके बार फ्रांस की एक कंपनी ने भी ये दावा किया था लेकिन 1908 ईसवी में पूरी दुनिया मे राइड बंधु को अविष्कार की मान्यता दे दी ?
* जरा बताना की वह पहले विमान चालक का नाम और उसके अविष्कार करने वालो का नाम ?
* बंदूक और तोप के आविष्कार करने वालो का नाम ?
* उत्तर का सूर्य नीचे नीचे गिरता है ।
* सूर्य नीचे नीचे गिरता है , तो उठा लो
* इसका का फैसला में आप लोगो के उपर छोड़ दे हु ।
एक बार जरूर निचे दीये व्यक्तियो को जरूर सर्च करे ।
* और सब से बड़ा सत्य तो ये है , जो सच्चे वैदिक धर्म को मानने वाले है , और सब मानव का आदर और समान करते है जो कि 90 % लोग है जो कि आर्य समाज को वैदिक धर्म के नही मानते और आर्य समाज को कचरा कहते है ये मेरे शब्द नही बल्कि जिनसे सुना उनकी बात कर रहा हु , जिसका एक उदाहरण ये है ,ये महाशय भी वैदिक धर्म को मानने वाले है जो कि 1 वेब साइट , 3 ब्लॉग और फेसबुक पेज इत्यादि का काम करते है !
* आर्य समाज एक कलंक है मानव जाति
के लिए जिसने लोगो मे नफरत का बीज बोया है , दयानन्द जहा कई भी गए केवल
उनका तिरस्कार और अपमान ही हुआ है और ऐसे व्यक्ति के लिए यजुर्वेद क्या
कहता है आये देखते है ?
* इस मन्त्र का निचोड़ है कि जो , झुट और ज्यादा गप्प शप्प करता है ,और लोगो को मूर्ख बनाने का प्रयत्न करता है वो साधा ठगा जाता है ।
* जितना दाता मन विचारे उसको अधिक करके वह न बोले ।
| ( यजुर्वेद 23 : 23 ) |
* इस मन्त्र का निचोड़ है कि जो , झुट और ज्यादा गप्प शप्प करता है ,और लोगो को मूर्ख बनाने का प्रयत्न करता है वो साधा ठगा जाता है ।
| अर्थवेद 11 : 3 : 25 |
* जितना दाता मन विचारे उसको अधिक करके वह न बोले ।
* मतलब की कोई अपनी जानकारी से ज्यादा न बोले ( जिस चीजो का ज्ञान नही है उस बारेमे झूठ न बोले ) अर्थवेद 11 : 3 :25
* इसीलिए लिए आज इन्ही की इज्जत इन्ही लोगो मे नही है और दयानद के चेले भी यही करते नजर आते है , लोगो मे नफरत फैलाओ ।
* हा अगर खुद के सत्य होने का दावा है , तो लोगो को अपने धर्म की शिक्षा बताओ जिसका पसंद आएगा वो खुद आगे से चलके तुम्हारे पास आ जायेगा तुम्हे उसके पास जाने की कोई आवश्यकता नही पड़गी ।
* पर नही लोगो मे नफ़रत फैलाने का ठेका जो ले रखा है , ये घबरा गए है कि हमारी दुकान बंद होने वाली है और सब यहा से निकल कर जा रहे है , यही असल वजह है इनकी बौखलाहट का ।
* इसलिए इस्लाम पर ताना काशी
कर ते नजर आते है , मगर इस्लाम पर कीचड़ उछालने की ना काम कोशिश के सबब
खुद ही के कपड़े मेंले कर रहे है ।
* और लोगो में इस्लाम के बारे
में इच्छुक जाग रही है और वे लोग इस्लाम का अध्ययन कर रहे है , और जिसको
पंसद आ रहा है , वे इस्लाम के दमन से लिपटे जा रहा है ।
* और दुनिया मे सबसे तेजी से फैलने वाला सच्चा दिन इस्लाम है । अल्हम्दुलिल्लाह ।
* ये होती है असल शिक्षा का नतीजा ।
इस्लाम को क़ुदरत ने वो लचक दी है
तुम जितना इसे दबाउंगे ये उतना ही उभरेगा।
* दयानंद की मुर्त्यु 30 अक्टूबर
1883 को होइ जो कि बहुत ही दर्दनाक थी , यहा पर भी एक बहुत बड़ा झुट बोला
जाता है कि उन्हें जहर दिया गया था , सत्य तो कुछ और ही है और कई शोक भी
थे , तंबाकू इत्यादि का बरहाल हमे इन बताओ से कोई गरज नही वो अपने अंजाम
तक पहुच चुका है अनक़रीब उनके चेले भी पहुच ही जांयगे ।
* बरहाल हमे आपकी मान्यता से कोई गरज नही क्यों कि इस्लाम कभी किसी को गलत नही कहता ।
* किंतु कुछ चुतिया ( मुर्ख ) को उनकी भाषा मे जब तक ना समझया जाए जब तक उन्हें समझ नही आता 😊😊
* आग तुम ने लगाई है इन्शाल्लाह बूझेंगे हम
नही तो सत्यार्थ प्रकाश
को भरे रोड पर ला के सब के सामने जलाओ और पूरे आर्य समाजी मुस्लिमों से
माफी मांगे नही तो पूरा बरहना कर देंगे ।
*पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).
* हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।(2-256).
*पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).
*नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।
(81:27,28,29)(40:28)
(81:27,28,29)(40:28)
* ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है(सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).
* और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)
*कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).
*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है।
(17:81)
NOTE : - जो प्रशन दयानद ने इस्लाम
के बारे में किये थे अल्हम्दुलिल्लाह उसका जवाब तो हम दे सकते है पर इनके
दिमाग मे जंग लगा है इसलिए जो जैसी भाषा समझता है उसे वैसे ही समझना पड़ता
है ।
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* इसी बाते सुनकर मानव जाति का सर
शर्म से नीचे झुक जाता है , बरहाल मैन जो भी प्रमाण दिए है आप स्वतः चेक कर
ये बाते लिखी है इत्यादि संबंध में ।
* अगर किसी को ठेस पहुंची तो क्षमा चाहता हु । 😢
* इस लेख का मकसद किसी की धार्मिक
भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि उन इस्लाम विरोधी को जवाब देना है जो
खुद की धार्मिक गर्न्थो की मान्यता को नही जानते और इस्लाम और मुसलमानों के
ऊपर तानाकाशी करते है।
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